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पाय का एनजीओ पहुंचा रहा अंधेरे गांव में रोशनी

March 31, 2019

भारत बिजली बनाने और उसकी खपत करने वाला दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है मगर फिर भी भारत में ही लाखों लोग आज भी अंधेरे में जी रहे हैं। इसको एक बड़े व्यंग की तरह से देखा जा सकता है। एक सच्चा व्यंग। खैर, लोगों के इस अधेंरे को दूर करने के लिए तमाम सरकारें लगातार की बातें करती हैं और इसी कड़ी में अब लोग खुद भी जुड़ गए हैं। चिराग रुरल डेवलपमेंड फांउडेशन नाम के एनजीओ ने जिम्मा उठाया है कि वह भारत के दूर-दराज के अधेंरे में रहने वाले गावों तक रोशनी पहुंचाएगा। एनजीओ की संस्थापक प्रतिभा पाय का कहना है कि 2020 तक वह 15,000 गांव तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहीं हैं जिससे लगभग 2 लाख लोगों का जीवन प्रभावित होगा। हाल ही में पाय के एनजीओ ने महाराष्ट्र में पालघार जिले के बालदयाचपाडा में बिजली पहुंचाने का काम पुरा किया है। यह उनके चिराग मिशन का 400वां गांव है।

 

प्रतिभा पाय ने यह एनजीओ 2010 में शुरु किया था तब वह एच.आर. कॉलेज आफ कोमर्स एंड इकोनोमिक्स में पऱोफेस्सर थी और उन्होंने इसकी शुरुआत अपने विद्यार्थियों के साथ ही मिलकर की थी। इसकी शुरुआती सफलता ने उनके भीतर इसपर आगे काम करने का जज्बा पैदा कर दिया और एक साल बाद उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर सारा ध्यान इसी पर लगा दिया। इस एनजीरओ की शुरूआत की वजह पर पाय कहती हैं कि इस देश में ऐसे हजारों गांव हैं जहां के लोग आज भी अंधेरे में अपना जीवन बिता रहें हैं और हम इस ग्रामीण भारत में एक बदलाव लाना चाहते हैं।

 

कैसी करती है गांव में रोशनी?

 

कुछ वेबसाइट और समाचार माध्यमों को दिए गए साक्षात्कार में पाय ने बताया कि किस गांव में बिजली की कितनी कमी है और उसको कैसे पूरा करना है इसकी जानकारी सबसे पहले इकट्ठी की जाती है और फिर उसके हिसाब से एक प्लान तैयार किया जाता है। एक प्रोजेक्ट को करने में लाखों रुपये का खर्चा होता है जिसे एनजीओ प्राइवेट कंपनियों से लेने का प्रयास करता है। गांव वालों को सोलर पेनल बहुत ही कम दाम में दिया जाता है। गांव वालों से 300 से 500 रुपये लिए जाते है ताकि वह इसके प्रति सजग रहें और इसका इस्तेमाल के प्रति जागरुक होकर इसे लें। इसके उपयोग करने के विधि और फायदों के बारें में लोगों को बताता है।  

 

पाय कहती हैं कि उनका एनजीओ न केवल बिजली, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ की समस्याओं का भी समाधान करने का यत्न कर रहा है। इस वक्त यह एनजीओ मेघालय, असम, उत्तरांचल, कर्नाटका, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में काम कर रहा है।

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