एक डॉक्टर जिसने रंगवा दी शहर की दीवारें

जगह-जगह फैला कूड़ा, सड़क किनारों की दीवारें जिन पर पुते होते थे विज्ञापन, लगी होती थी पान की पीक, बदहाल पार्क जिनमे जाने की बजाये बच्चे बाहर खेलना पसंद करते थे और जो सिर्फ कालोनी का कूड़ाघर बन कर रह गये थे। इन सबको देखना और सहन करना एक इंसान के लिये मुश्किल था। मन में थी हालात बदलने और शहर को स्वच्छ करने की कसमसाहट। एक दिन वह अपने चंद साथियों के साथ निकल पड़ा शहर की बदहाल सूरते को बदलने के लिये। ‘नेक नीयत, मंजिल आसान’ अंगुली पर गिने जाने वाले साथियों का कारवां बढ़ता गया और राहे मंजिल आसान होती चली गयी। उस इंसान की इस छोटी सी 'पहल' का कार्य लोगों के लिये प्रेरणा बना तो खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी अपने कार्यक्रम ‘मन की बात’ में तीन बार इसकी खुलकर प्रशंसा कर चुके हैं। आज दूसरे राज्यों की सरकारें भी उन्हें बुला रही हैं कि वो उनके राज्यों की गंदी हो चुकी सूरत को बदलने में सहयोग करें।

हम बात कर रहे हैं मेरठ के प्रसिद्ध चिकित्सक डा. विश्वजीत बैंबी की जो अपने शहर की बदहाल हालत को देखकर हमेशा चिंतित रहते थे। एक दिन उन्होंने इसमे बदलाव लाने की ठानी और अपने साथी चिकित्सक, इंजीनियर्स, बुद्धिजीवी और चंद बच्चों को लेकर एक पहल की। 26 जनवरी 2014 से 'पहल एक प्रयास' ने स्वच्छता अभियान की शुरूआत की। हाथों में झाडू, फावड़े, दीवारों पर पोतने के लिये रंग लिये कुछ लोग निकल पड़े शहर को साफ करने। ‘मै अकेला ही निकला था सरेराह लेकिन, लोग मिलते गये कारवां बढ़ता गया’। डा.विश्वजीत बैंबी के इस प्रयास की हर किसी ने प्रशंसा की और लोगों के संस्था से खुद-ब-खुद जुड़ने का सिलसिला शुरू हो गया। । संस्था ने 15 जून 2014 में अपना रजिस्ट्रेशन कराया और अब उन्हें कार्य करते हुए तीन साल से अधिक हो गये हैं।

सामाजिक संस्था 'पहल एक प्रयास’ में डॉक्टर्स, इंजीनियर और बहुत से बुद्धिजीवी के साथ-साथ बच्चे भी

जुड़े हैं। ये सभी छुट्टी के दिन किसी एक क्षेत्र को चुनकर सफाई अभियान चलाते हैं। उनके प्रयास सफल होते गये और कूड़ाघर बन चुके बदहाल पार्कों में बच्चे खेलने लगे, पान की पीकों और गंदगी से सराबोर दीवारों पर सुंदर कलाकृतियां दिखने लगीं। चौराहे आज अपनी सुंदरता से सबको आकर्षित कर रहे हैं। आज पहल एक प्रयास से बड़ी संख्या में डाक्टर्स, इंजीनियर्स, बुद्धिजीवियों से लेकर बच्चे-बुजुर्ग तक जुड़ चुके हैं और शहर को स्वच्छ बनाने के प्रयास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उनके सराहनीय कार्यों को देखते हुए हरियाणा सरकार ने भी उन्हें अपने यहां आमंत्रित किया ताकि वह हरियाणा के लोगों को भी सफाई के प्रति जागरूक कर सकें। डा. विश्वजीत बैंबी दो बार कुरूक्षेत्र की यूनिवर्सिटी में प्रजेंटेशन देकर लोगों को जागरूक कर चुके हैं। डॉ. विश्वजीत के अनुसार पीएम नरेंद्र मोदी अपने कार्यक्रम मन की बात में तीन बार पहल एक प्रयास के कार्यों को सराह चुके हैं।

डा.विश्वजीत बैंबी का कहना है कि उनके स्वच्छता अभियान में आम आदमी के सहयोग और जागरूकता की बेहद आवश्यकता है। एक बार इलाके में सफाई हो जाने के बाद यह वहां के लोगों की जिम्मेदारी है कि वो उस जगह की सुंदर और स्वच्छ बनाये रखें। वहीं प्रशासन भी स्वच्छ दीवारों पर पोस्टर चिपकाने, वॉल पेंटिंग करने और गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे तो ‘पहल एक प्रयास का’ उद्देश्य सार्थक हो सकेगा।

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