माहवारी - अब टूटे गी चुप्पी हमारी

माहवारी स्वच्छता दिवस के अवसर पर सृजन फाउंडेशन द्वारा १०९० चौराहे पर 'माहवारी-अब टूटेगी चुप्पी हमारी' आओ करें हिम्मत नाम से एक जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया. इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसमें पुरुषो को भी शामिल किया गया था. उनको यह बात समझाई गयी की माहवारी कोई हंसने का विषय नहीं है. यह प्राकृतिक और अत्यंत ज़रूरी चीज़ है. अगर यह नहीं होती तो आज वो भी नहीं होते. इंसान की उत्पत्ति का आधार है माहवारी.

इस विषय पर पुरुषों की भागीदारी कराना सबसे अच्छी बात है. लड़कियों को जो भी हिचकिचाहट होती है वो यही होती है की लड़के इस बात का सबसे ज्यादा मजाक बनाते हैं. यदि पुरुषों को यह समझ आ जाएगा कि यह ऐसी प्राकृतिक चीज़ है जिसके कारण वो जन्म ले पाए हैं तो वो इसको मजाक का विषय नहीं बनाएँगे.

इस अवसर पर एक सांकेतिक सेनेटरी पैड पर हस्ताक्षर अभियान कराया गया जिसमें कि लड़के लड़कियों दोनों ने अपने अपने विचार लिखे. डोंट शाय विथ रेड स्पॉट (Don't Shy with Red Spot) के अंतर्गत एक सफ़ेद कपड़े पर लड़कियों ने लाल रंग की छाप लगाई और यह सन्देश दिया कि हमें लाल धब्बे से शर्माना नहीं है. वहां पर उपस्थित लड़कियों ने स्लोगन 'तुम खून बहाओ तो वीर चरित्र और हम खून बहाएं तो अपवित्र' के साथ सबसे ज्यादा फोटो खिचवाई. इसके अतरिक्त वहां उपस्थित कई लड़कियों को बिना काली पन्नी अथवा अखबार में लपेटे सेनेटरी पैड दिए गए और उनको इस बात का एहसास कराया गया कि यह उनका अधिकार है और अधिकार छुपा कर नहीं लिया जाता खुल कर लिया जाता है.

सृजन फाउंडेशन अध्यक्ष डॉ. अमित सक्सेना ने बताया कि जब उन्होंने लड़के होते हुए इस टॉपिक पर काम शुरू किया तो पहले तो लोग चौंके लेकिन उसके बाद सभी लोगों का विशेषकर महिलाओं और लड़कियों का बहुत सपोर्ट मिला. तब से ही इस अभियान को लड़कियों और लड़कों दोनों के बीच में किया जाने लगा ताकि आपसी झिझक ख़तम हो और सही ज्ञान प्राप्त हो पाए तथा रूढ़िवादी मानसिकता से बाहर निकला जा सके.

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